उन्होंने बताया कि भगत सिंह को जब फांसी के लिए ले जाया जा रहा था तब लाहौर सेंट्रल जेल के वार्डन सरदार चतर सिंह ने उनसे आखिरी वक़्त ईश्वर को याद करने को कहा. भगत सिंह ने मुस्कुराते हुए जवाब दिया था कि सारी जिंदगी दुखियों और गरीबों के कष्ट देखकर मैं ईश्वर को नकारता रहा, और अब मैं उन्हें याद करूंगा तो लोग मुझे बुजदिल समझेंगे और कहेंगे कि देखो ये आखिरी वक़्त मौत से डर गया. उनके इस कथन से इस बात का इशारा मिलता है वो नास्तिक नहीं थे इसलिए इतिहासकारों के जानिब से उन्हें नास्तिक बताया जाना गलत है.

 अंत में, जब एक नया एसईओ अभियान शुरू करना, खासकर छोटे बजट के साथ, यह कम-फांसी वाले फल को पहचानने और लक्षित करने में सहायक होता है एक अच्छी रणनीति उन खोजशब्दों को लक्षित करना है जो एक वेबसाइट पहले से ही रैंक करती है, लेकिन अभी तक मजबूत परिणामों को हासिल करने में सक्षम स्थिति में नहीं हैं प्रायः किसी भी अनुकूलन के प्रयास के बिना एक वेबसाइट रैंकिंग पेज 1 या पेज 2 पर रैंकिंग करता है। उन खोजशब्दों के लिए एक अनुकूलन योजना को लागू करने से, वेबसाइट अक्सर रैंक को ऐसी स्थिति में आगे बढ़ा सकती है जो मजबूत परिणाम प्राप्त करेगी।


स्वतंत्रता सेनानी बाबा रणधीर सिंह 1930-31 के बीच लाहौर के सेन्ट्रल जेल में कैद थे. वे एक धार्मिक व्यक्ति थे जिन्हें यह जान कर बहुत कष्ट हुआ कि भगतसिंह का ईश्वर पर विश्वास नहीं है. वे किसी तरह भगत सिंह की काल कोठरी में पहुँचने में सफल हुए और उन्हें ईश्वर के अस्तित्व पर यकीन दिलाने की कोशिश की. असफल होने पर बाबा ने नाराज होकर कहा, “प्रसिद्धि से तुम्हारा दिमाग खराब हो गया है और तुम अहंकारी बन गए हो जो कि एक काले पर्दे के तरह तुम्हारे और ईश्वर के बीच खड़ी है. इस टिप्पणी के जवाब में ही भगतसिंह ने यह लेख लिखा.
मई 1927 में मैं लाहौर में गिरफ़्तार हुआ. रेलवे पुलिस हवालात में मुझे एक महीना काटना पड़ा. पुलिस अफ़सरों ने मुझे बताया कि मैं लखनऊ में था, जब वहाँ काकोरी दल का मुकदमा चल रहा था, कि मैंने उन्हें छुड़ाने की किसी योजना पर बात की थी, कि उनकी सहमति पाने के बाद हमने कुछ बम प्राप्त किये थे, कि 1927 में दशहरा के अवसर पर उन बमों में से एक परीक्षण के लिये भीड़ पर फेंका गया, कि यदि मैं क्रान्तिकारी दल की गतिविधियों पर प्रकाश डालने वाला एक वक्तव्य दे दूँ, तो मुझे गिरफ़्तार नहीं किया जायेगा और इसके विपरीत मुझे अदालत में मुखबिर की तरह पेश किये बगैर रिहा कर दिया जायेगा और इनाम दिया जायेगा. मैं इस प्रस्ताव पर हँसा. यह सब बेकार की बात थी. हम लोगों की भाँति विचार रखने वाले अपनी निर्दोष जनता पर बम नहीं फेंका करते. एक दिन सुबह सी. आई. डी. के वरिष्ठ अधीक्षक श्री न्यूमन ने कहा कि यदि मैंने वैसा वक्तव्य नहीं दिया, तो मुझ पर काकोरी केस से सम्बन्धित विद्रोह छेड़ने के षडयन्त्र और दशहरा उपद्रव में क्रूर हत्याओं के लिये मुकदमा चलाने पर बाध्य होंगे और कि उनके पास मुझे सजा दिलाने और फाँसी पर लटकवाने के लिये उचित प्रमाण हैं.
हमें देखना है कि मैं कैसे निभा पाता हूँ. मेरे एक दोस्त ने मुझे प्रार्थना करने को कहा. जब मैंने उसे नास्तिक होने की बात बतायी तो उसने कहा, ‘'अपने अन्तिम दिनों में तुम विश्वास करने लगोगे.'’ मैंने कहा, ‘'नहीं, प्यारे दोस्त, ऐसा नहीं होगा. मैं इसे अपने लिये अपमानजनक और भ्रष्ट होने की बात समझाता हूँ. स्वार्थी कारणों से मैं प्रार्थना नहीं करूँगा.'’ पाठकों और दोस्तों, क्या यह अहंकार है? अगर है तो मैं स्वीकार करता हूँ.
Because Update Management performs update enrichment in the cloud, some updates might be flagged in Update Management as having security impact, even though the local machine doesn't have that information. As a result, if you apply critical updates to a Linux machine, there might be updates that aren't marked as having security impact on that machine and the updates aren't applied.
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This is because Ooma chose to round out its SEO solution by including Rio SEO Change Tracker, which automatically identifies and alerts marketers when changes are made to web pages that can alter organic search results.  The page-tracking tool monitors website change regardless of where they were made across an organization.  The innovative tool also provides competitor alerts and SEO assessments.
पीपीसी अभियान किसी भी अच्छी तरह से गोल विपणन कार्यक्रम का एक महत्वपूर्ण घटक बने रहे हैं और विशेष रूप से एक नए व्यवसाय के लिए प्रारंभिक यातायात के निर्माण के लिए महत्वपूर्ण हैं। उन्नत लक्ष्यीकरण विभाजन के लिए धन्यवाद, ये अभियान तेजी से योग्य लीडों की एक बड़ी संख्या प्रदान करते हैं। इससे भी बेहतर, क्योंकि पीपीसी आसानी से बाजार गतिशीलता के जवाब में tweaked किया जा सकता है, पीपीसी जोखिम जोखिम जोखिम कम करने के दौरान नए बाजारों और ग्राहकों के बाद जाने के लिए लचीलापन देता है।
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रोमांस की जगह गम्भीर विचारों ने ले ली, न और अधिक रहस्यवाद, न ही अन्धविश्वास. यथार्थवाद हमारा आधार बना. मुझे विश्वक्रान्ति के अनेक आदर्शों के बारे में पढ़ने का खूब मौका मिला. मैंने अराजकतावादी नेता बुकनिन को पढ़ा, कुछ साम्यवाद के पिता मार्क्स को, किन्तु अधिक लेनिन, त्रात्स्की, व अन्य लोगों को पढ़ा, जो अपने देश में सफलतापूर्वक क्रान्ति लाये थे. ये सभी नास्तिक थे. बाद में मुझे निरलम्ब स्वामी की पुस्तक ‘सहज ज्ञान’ मिली. इसमें रहस्यवादी नास्तिकता थी. 1926 के अन्त तक मुझे इस बात का विश्वास हो गया कि एक सर्वशक्तिमान परम आत्मा की बात, जिसने ब्रह्माण्ड का सृजन, दिग्दर्शन और संचालन किया, एक कोरी बकवास है. मैंने अपने इस अविश्वास को प्रदर्शित किया. मैंने इस विषय पर अपने दोस्तों से बहस की. मैं एक घोषित नास्तिक हो चुका था.
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क्या तुम मुझसे पूछते हो कि मैं इस विश्व की उत्पत्ति और मानव की उत्पत्ति की व्याख्या कैसे करता हूँ? ठीक है, मैं तुम्हें बताता हूँ. चाल्र्स डारविन ने इस विषय पर कुछ प्रकाश डालने की कोशिश की है. उसे पढ़ो. यह एक प्रकृति की घटना है. विभिन्न पदार्थों के, नीहारिका के आकार में, आकस्मिक मिश्रण से पृथ्वी बनी. कब? इतिहास देखो. इसी प्रकार की घटना से जन्तु पैदा हुए और एक लम्बे दौर में मानव. डार्विन की ‘जीव की उत्पत्ति’ पढ़ो. और तदुपरान्त सारा विकास मनुष्य द्वारा प्रकृति के लगातार विरोध और उस पर विजय प्राप्त करने की चेष्टा से हुआ. यह इस घटना की सम्भवतः सबसे सूक्ष्म व्याख्या है.
उसी दिन से कुछ पुलिस अफ़सरों ने मुझे नियम से दोनों समय ईश्वर की स्तुति करने के लिये फुसलाना शुरू किया. पर अब मैं एक नास्तिक था. मैं स्वयं के लिये यह बात तय करना चाहता था कि क्या शान्ति और आनन्द के दिनों में ही मैं नास्तिक होने का दम्भ भरता हूँ या ऐसे कठिन समय में भी मैं उन सिद्धान्तों पर अडिग रह सकता हूँ. बहुत सोचने के बाद मैंने निश्चय किया कि किसी भी तरह ईश्वर पर विश्वास और प्रार्थना मैं नहीं कर सकता. नहीं, मैंने एक क्षण के लिये भी नहीं की. यही असली परीक्षण था और मैं सफल रहा. अब मैं एक पक्का अविश्वासी था और तब से लगातार हूँ. इस परीक्षण पर खरा उतरना आसान काम न था. ‘विश्वास’ कष्टों को हलका कर देता है. यहाँ तक कि उन्हें सुखकर बना सकता है.
इतना तो आप कभी भी बहुत मेहनत की है कि बिना सामग्री है और इतना कमा आगंतुकों को आसानी से पता चल जाएगा कारण बहुत सरल है जब मुझे लगता है कि मैं एक सामग्री प्रतियोगिता इसी तरह की सामग्री है कि क्या वे ऊपर या मुझे नीचे उन खोजों मैं मैं देख रहा हूँ पर क्या कर रहे हैं देखो क्या सामग्री है और वे प्रतियोगिता का विश्लेषण करती है, तो मैं देख रहा हूँ, क्योंकि हर कोई अपने प्रतियोगिता हर कोई देखता है, तो मैं एक और प्रतिस्पर्धा मिल
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