स्वतंत्रता सेनानी बाबा रणधीर सिंह 1930-31 के बीच लाहौर के सेन्ट्रल जेल में कैद थे. वे एक धार्मिक व्यक्ति थे जिन्हें यह जान कर बहुत कष्ट हुआ कि भगतसिंह का ईश्वर पर विश्वास नहीं है. वे किसी तरह भगत सिंह की काल कोठरी में पहुँचने में सफल हुए और उन्हें ईश्वर के अस्तित्व पर यकीन दिलाने की कोशिश की. असफल होने पर बाबा ने नाराज होकर कहा, “प्रसिद्धि से तुम्हारा दिमाग खराब हो गया है और तुम अहंकारी बन गए हो जो कि एक काले पर्दे के तरह तुम्हारे और ईश्वर के बीच खड़ी है. इस टिप्पणी के जवाब में ही भगतसिंह ने यह लेख लिखा.
अधिकतम लाभ प्रा्रा्राप्त करने की चाहत (Desire of getting maximum profit) वर्तमान व्यावसायिक परिवेश में व्यवसाय का प्रमुख उद्देश्य अधिकाधिक लाभ कमाना माना जाने लगा है। अत: अधिकतम लाभ प्राप्ति हेतु व्यवसायों के लिए आवश्यक हो जाता है कि वे अपने उत्पाद एवं सेवा की लागत को न्यूनतम करने के साथ-साथ सर्वोत्तम सेवा प्रदान करके अधिकतम लाभ कमायें। अत: इसके लिये व्यवसाय को उत्पादन से लेकर वितरण तक की समस्त पहलुओं या प्रक्रियाओं का गहन अध्ययन एवं विश्लेषण करके सर्वोत्तम विकल्प एवं अधिकतम कुशलता प्राप्त करनी होगी। यह लक्ष्य व्यावसायिक वातावरण के अध्ययन एवं मूल्यांकन के पश्चात् ही प्राप्त हो सकता है।
आपको तर्कसंगत रूप से विज्ञापन प्रसारण की आवृत्ति के दृष्टिकोण की आवश्यकता है। उपयोगकर्ताओं और विज्ञापन चैनलों को दोबारा लगाने के लिए उपकरण काफी हैं अगर इसे ज़्यादा करना और पूरी तरह से सब कुछ का उपयोग करें, विज्ञापनदाता के बैनर कर सकते हैं धक्का ग्राहक। यह इस प्रकार है कि आपको सही पुनः लक्ष्यीकरण अभियान रणनीति का उपयोग करना होगा। अन्यथा, रूपांतरण अपरिवर्तित रहेगा, और आपका बजट व्यर्थ होगा।
'मैं नास्तिक क्यों हूं?' लेख लिखने के पीछे एक दिलचस्प किस्सा है. कहते हैं जब आज़ादी के सिपाही बाबा रणधीर सिंह को ये बात पता चला कि भगत सिंह को ईश्वर में यकीन नहीं है, तो वो किसी तरह जेल में भगत सिंह से मिलने उनके सेल पहुंच गए. जहां भगत सिंह को रखा गया था. रणधीर सिंह भी साल 1930-31 के दौरान लाहौर के सेंट्रल जेल में बंद थे. वे बेहद धार्मिक प्रवृत्ति वाले व्यक्ति थे. उन्‍होंने भगत सिंह से ईश्वर के अस्तित्व को मानने के लिए कहा. उसके लिए उन्होंने तमाम तर्क दिए. यकीन दिलाने की खूब सारी कोशिश की. लेकिन इतनी मेहनत के बाद भी वो कामयाब नहीं हो सके. अपने मकसद में मिली नाकामयाब से नाराज होकर बाबा रणधीर ने भगत सिंह से कहा कि ये सब तुम मशहूर होने के लिए कर रहे हो. तुम्हारा दिमाग खराब हो गया है. तुम अहंकारी बन गए हो. मशहूर होने का लोभ ही काले पर्दे की तरह तुम्हारे और ईश्वर के बीच खड़ा हो गया है.
एक नया सवाल उठ खड़ा हुआ है. क्या मैं किसी अहंकार की वजह से सबसे ताकतवर, सर्वव्यापी और सर्वज्ञानी ईश्वर के अस्तित्व पर विश्वास नहीं करता हूं? मेरे कुछ दोस्त, शायद ऐसा कहकर मैं उन पर बहुत हक़ नहीं जमा रहा हूं, मेरे साथ अपने थोड़े से संपर्क में इस निष्कर्ष पर पहुंचने के लिये उत्सुक हैं कि मैं ईश्वर के अस्तित्व को नकार कर कुछ ज़रूरत से ज़्यादा आगे जा रहा हूं और मेरे घमंड ने कुछ हद तक मुझे इस अविश्वास के लिए उकसाया है.
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