मैं ऐसी कोई शेखी नहीं बघारता कि मैं मानवीय कमज़ोरियों से बहुत ऊपर हूँ. मैं एक मनुष्य हूँ, और इससे अधिक कुछ नहीं. कोई भी इससे अधिक होने का दावा नहीं कर सकता. यह कमज़ोरी मेरे अन्दर भी है. अहंकार भी मेरे स्वभाव का अंग है. अपने कॉमरेडों के बीच मुझे निरंकुश कहा जाता था. यहाँ तक कि मेरे दोस्त श्री बटुकेश्वर कुमार दत्त भी मुझे कभी-कभी ऐसा कहते थे. कई मौकों पर स्वेच्छाचारी कह मेरी निन्दा भी की गई. कुछ दोस्तों को शिकायत है, और गम्भीर रूप से है कि मैं अनचाहे ही अपने विचार, उन पर थोपता हूँ और अपने प्रस्तावों को मनवा लेता हूँ. यह बात कुछ हद तक सही है. इससे मैं इनकार नहीं करता. इसे अहंकार कहा जा सकता है. जहाँ तक अन्य प्रचलित मतों के मुकाबले हमारे अपने मत का सवाल है. मुझे निश्चय ही अपने मत पर गर्व है. लेकिन यह व्यक्तिगत नहीं है.
उपलब्ध संसाधनों का अधिकतम या अनुकूलतम उपयोग (Maximum or optimum utilisation of available resources) किसी भी देश में उपलब्ध साधनों को मुख्य रूप से दो भागों में बांटा जा सकता है- पहला प्राकृतिक संसाधन (Natural Resources) तथा दूसरा-मानवीय संसाधन (Human Resources) देश में उपलब्ध प्राकृतिक संसाधन किसी व्यवसाय की प्रकृति, परिमाप एवं प्रगति निर्धारित करते हैं, जबकि मानवीय संसाधन व्यवसाय में अपनाये जाने वाली तकनीक, ज्ञान, उत्पादन, परिमाप, तकनीकें, औद्योगिक सद्भाव, प्रबन्धकीय कुशलता से काफी सीमा तक प्रभावित होती है। अत: व्यावसायिक वातावरण के अध्ययन द्वारा यह ज्ञात हो जाता है कि किसी देश या व्यवसाय में उपलब्ध संसाधनों का कितना प्रयोग हो रहा है? यदि पूर्ण क्षमता प्रयोग नहीं हो पा रहा है तो भी इसको व्यावसायिक वातावरण के अध्ययन द्वारा परिलक्षित किया जा सकता है।
जनसंख्या (Population) कार्इे भी व्यवसाय प्राय: तभी उन्नति या विकास करता है, जब उसके ग्राहकों की संख्या अधिक हो, अत: ग्राहकों की अधिक संख्या के लिए पर्याप्त जनसंख्या का होना आवश्यक है। व्यावसायिक दृष्टिकोण से अधिक जनसंख्या व्यवसाय के लिए लाभप्रद होती है। इसके विपरीत यदि किसी क्षेत्र में जैसे-पहाड़, जंगल, नदी, समुद्र, पठार आदि अधिक हैं तथा जनसंख्या नाम मात्र की है, तो वहाँ व्यावसायिक गतिविधियाँ संकुचित एवं कम होंगी। इस प्रकार जनसंख्या सम्बन्धी तत्व व्यावसायिक वातावरण को प्रभावित करते हैं।
एक सार्थक, उत्पादक चर्चा करने में सहायता करने के लिए, हम यह अनुशंसा कर रहे हैं कि आप लोगों को इन भूमिकाओं में से प्रत्येक के लिए स्वयंसेवा करने को कहें। यह भूमिकाएं सभी प्रतिभागियों को चर्चा के उद्देश्य पर ध्यान केंद्रित रहने और दोस्ताना स्थान उम्मीदों का पालन करने की अनुमति देती हैं। यदि आप चर्चा समन्वयक हैं, तो आप सुविधाकर्ता या लेखक भी हो सकते हैं, या आप उस भूमिका में किसी और को नामित कर सकते हैं।
व्यावसायिक क्षेत्र में अनेक परिवर्तन आते रहते है जो उपक्रम के लिए विकास एवं प्रगति का मार्ग ही नहीं खोलते हैं, वरन् अनेक जोखिमों एवं अनिश्चितताओं को भी उत्पन्न कर देते हैं। प्रतिस्पर्द्धा, प्रौद्योगिकी, सरकारी नीति, आर्थिक क्रियाओं, श्रम पूर्ति, कच्चा माल तथा सामाजिक मूल्यों एवं मान्यताओं में होने वाले परिवर्तनों के कारण आधुनिक व्यवसाय का स्वरूप अत्यन्त जटिल हो गया है। ऐसे परिवर्तनशील वातावरण में नियोजन के आधार पर ही व्यावसायिक सफलता की आशा की जा सकती हैं। आज के युग में नियोजन का विकास प्रत्येक उपक्रम की एक महत्वपूर्ण आवश्यकता है। व्यावसायिक बर्बादी, दुरूपयोग व, जोखिमों को नियोजन के द्वारा ही कम किया जा सकता है। नियोजन की आवश्यकता एवं महत्व को निम्न बिन्दुओं के आधार पर स्पष्ट किया जा सकता है :
साइट का उद्देश्य क्या है? अक्सर एक वेबसाइट को एक स्पष्ट उद्देश्य के फोकस की कमी होती है और विज़िटर्स जल्दी से भ्रमित हो जाते हैं और क्लिक करते हैं। इंटरनेट उपयोगकर्ता आज अधीर हैं। एक वेबसाइट विज़िटर्स यह जानने के लिए अपना मूल्यवान समय नहीं व्यतीत करेगा कि साइट क्या है (या यह उन्हें कैसे लाभ पहुंचा सकती है)। एक अच्छी तरह से परिभाषित उद्देश्य वाली एक वेबसाइट सामने है और एक विज़िटर्स को तुरंत प्रयास किए बिना इसे पहचानना चाहिए। इसकी रचना से पहले आपकी वेबसाइट के उद्देश्य को स्पष्ट रूप से परिभाषित करना सुनिश्चित करेगा कि आपकी वेबसाइट को आवश्यक उद्देश्य प्राप्त करने के लिए अनुकूलित किया गया है। आखिरकार, आप केवल अपने लक्ष्यों को पूरा कर सकते हैं जब आप जानते हैं कि वे क्या हैं।
उत्पन्न होने वाले खतरों के प्रति सतर्कता (Being alert regarding impending trouble) वर्तमान वैश्वीकरण एवं भूमण्डलीकरण परिवेश या वातावरण के कारण वैश्विक अर्थव्यवस्था में खुलापन विद्यमान होने लगा है। इस कारण विभिन्न वैश्विक अर्थव्यवस्थाओं में जहां विकास की नयी-नयी ऊँचाइयाँ प्राप्त हुर्इ हैं तथा रोजगार एवं अन्य विभिन्न अवसर उत्पन्न हुए हैं, वहीं हर पल नयी-नयी चुनौतियों, खतरों व समस्याओं के उत्पन्न होने की आशंका बनी रहती है। इनमें आर्थिक नीतियो, मांग एवं पूर्ति में कमी या वृद्धि, उपभोग की प्रवृत्ति, क्रय प्राथमिकताएं, प्रतिस्पर्धा आदि में होने वाले परिवर्तन व्यवसाय के लिए अनेकों चुनौतियाँ या प्रश्न खड़ा कर देते हैं। अत: इन परिवर्तनों के कारण किसी व्यवसाय में उत्पन्न होने वाले खतरों की जानकारी व समाधान व्यावसायिक वातावरण का अध्ययन एवं मूल्यांकन करके ही प्राप्त किया जा सकता है।
मैंने महसूस किया कि आप मुझ से कुछ की नकल की इस प्रकार आप नहीं लगता कि आप को पकड़ने के लिए क्योंकि हर कोई इसलिए उनकी क्षमता के बारे में चर्चा नहीं जा रहे हैं पता चलता है कि नहीं की तरह आप copyright का उल्लंघन चलना नहीं है दूसरों के काम का लाभ चलना नहीं है, लेकिन अपने काम को अपने स्वयं के बनाने के लिए अगर आपको लगता है कि मौलिकता लगता है तुम्हें पता है कि रचनात्मकता आप जब बजाय प्रतियोगिता का विश्लेषण नकारात्मक चीजों की खोज अपने उद्योग में उन पृष्ठों को पाने के लिए जा रहा है
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