नियोजन वह प्रक्रिया है जिसके द्वारा भावी उद्देश्यों तथा उन उद्देश्यों की प्राप्ति के लिए किये जाने वाले कार्यों को निर्धारित किया जाता है। इसके अतिरिक्त उन सभी परिस्थितियों की जाँच की जाती जिनसे इसका सरोकार हो। इस प्रक्रिया में किये जाने वाले कार्यों के सम्बन्ध में महत्वपूर्ण प्रश्नों के उत्तर भी निर्धारित किये जाते हैं ये कार्य कब, कहाँ, किस प्रकार, किनके द्वारा, किन संसाधनों से, किस नियम एवं प्रक्रिया के अनुसार पूरे किये जायेंगे। नियोजन को अनेक विद्वानों ने अनेक प्रकार से परिभाषित किया है। कुछ प्रमुखपरिभाषाएं निम्नानुसार हैं-
कानूनी वातावरण (Legal environment) कानूनी वातावरण का निर्माण देश द्वारा समाज के आर्थिक एवं सामाजिक लक्ष्यों, विचारधाराओं तथा मूल्यों के आधार पर निर्धारित होता है। विकासोन्मुखी व कल्याणकारी राज्य में उपभोक्ताओं, निर्धनों, बेरोजगारों, महिलाओं, बूढ़ों तथा अन्य जरूरतमन्द लोगों के हितों की रक्षा के लिए कानूनी प्रावधान किये जाते हैं। इसके लिए सरकार विभिन्न अधिनियमों एवं नियमों के माध्यम से व्यवसाय का संचालन करती है। अत: व्यवसाय भी इन्हीं परिसीमाओं के मध्य संचालित होता है। इस सम्बन्ध में प्रसिद्ध अर्थशास्त्री आर्थरलेविस का कहना है कि ‘‘सरकार का व्यवहार आर्थिक क्रियाओं के प्रोत्साहन एवं हतोत्साहन द्वारा भी व्यवसाय की दिशा व दशा तय करने में महत्वपूर्ण रूप से प्रभावित करने वाला तत्व है।

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औद्योगिक प्रव्रृत्तियाँ ( Industrial trends )- यदि किसी देश की औद्योगिक प्रवृत्ति में महत्वपूर्ण सकारात्मक परिवर्तन जैसे- आधारित संरचना का निर्माण, उद्योगों का सकल घरेलू उत्पाद में बढ़ता योगदान, भारी तथा पूँजीगत वस्तु के उद्योगों का विकास, टिकाऊ उपभोक्ता वस्तुओं का तीव्र विकास, सार्वजनिक क्षेत्र के उद्यमों का विकास, आयात प्रतिस्थापन, उद्योगों का विकास आदि संतोषजनक रूप से हुए हैं, तो ऐसे देश में प्राय: व्यावसायिक वातावरण अच्छा होगा। इसी प्रकार किसी एक उद्योग की प्रवृत्ति भी व्यावसायिक वातावरण का महत्वपूर्ण घटक होती है।
अत: स्पष्ट है कि व्यवसाय को सरलतापूर्वक एवं सफलापूर्वक संचालित करके कोर्इ भी देश या समाज अपना व्यावसायिक विस्तार एवं विकास तभी कर सकता है, जब वह व्यावसायिक वातावरण के प्रमुख घटकों का अध्ययन करके उसके अनुरूप अपने व्यवसाय को संचालित करता है। ये उपरोक्त घटक या तत्व देश के समस्त व्यवसायों से या किसी एक व्यवसाय से सम्बन्धित हो सकते हैं। साथ ही साथ यह आवश्यक नहीं है कि सम्पूर्ण घटक समस्त व्यवसायों या किसी व्यवसाय पर एक साथ लागू हों अर्थात किसी व्यवसाय के लिए कुछ ही घटक महत्वपूर्ण हो सकते है। इस प्रकार स्पष्ट है कि जो भी घटक व्यवसाय से सम्बन्धित होते हैं, उनके द्वारा व्यवसाय प्रभावित होता है।

सीमित समय और संसाधनों के साथ एक छोटे से व्यवसाय के रूप में, पूरी तरह से आपकी बिक्री टीम पर भरोसा करना कभी-कभी मौत की सजा हो सकती है। अपने कुछ संभावित फॉलो-अप को स्वचालित करने का प्रयास करें। ऐसा करके, आप ईमेल खुले दरों, रिपोर्ट डाउनलोड और अन्य इंटरैक्शन जैसे व्यवहारों को देखकर अपने ब्याज के स्तर की निगरानी कर सकते हैं। आप जानते हैं कि जिसने हर ईमेल खोला है, हर वेबिनार को देखा है और नि: शुल्क परामर्श का अनुरोध किया है, शायद यह संभावना है कि सौदे को बंद करने के लिए बिक्री के लिए तैयार किया जा सके। कुछ संचारों को स्वचालित करने से यह सुनिश्चित करने में मदद मिलती है कि बिक्री में जाने वाली लीड की गुणवत्ता अधिक है, जिसके परिणामस्वरूप बेहतर और तेज रूपांतरण होते हैं।
व्यावसायिक क्षेत्र में अनेक परिवर्तन आते रहते है जो उपक्रम के लिए विकास एवं प्रगति का मार्ग ही नहीं खोलते हैं, वरन् अनेक जोखिमों एवं अनिश्चितताओं को भी उत्पन्न कर देते हैं। प्रतिस्पर्द्धा, प्रौद्योगिकी, सरकारी नीति, आर्थिक क्रियाओं, श्रम पूर्ति, कच्चा माल तथा सामाजिक मूल्यों एवं मान्यताओं में होने वाले परिवर्तनों के कारण आधुनिक व्यवसाय का स्वरूप अत्यन्त जटिल हो गया है। ऐसे परिवर्तनशील वातावरण में नियोजन के आधार पर ही व्यावसायिक सफलता की आशा की जा सकती हैं। आज के युग में नियोजन का विकास प्रत्येक उपक्रम की एक महत्वपूर्ण आवश्यकता है। व्यावसायिक बर्बादी, दुरूपयोग व, जोखिमों को नियोजन के द्वारा ही कम किया जा सकता है। नियोजन की आवश्यकता एवं महत्व को निम्न बिन्दुओं के आधार पर स्पष्ट किया जा सकता है :
संसाधनों की उपलब्धता (Avialability of resources) किसी भी संगठन का आन्तरिक तत्व उस संगठन को उपलब्ध मानवीय एवं आर्थिक संसाधनों की मात्रा, दर व प्राप्ति समय द्वारा प्रभावित होता है। यदि किसी संगठन में इन संसाधनों की उपलब्धता आसानी से एवं उचित मात्रा, उचित बाजार दर पर एवं उचित समय पर है, तो संस्था को लक्ष्य प्राप्त करना आसान हो जाता है। इसके विपरीत यदि संस्था में इन संसाधनों का अभाव रहता है, तो संस्थागत लक्ष्य प्राप्त करना मुश्किल हो जाता है। इस प्रकार संसाधनों की उपलब्धता व्यावसायिक वातावरण को प्रभावित करती है।

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वैधानिक घटक के अन्तर्गत देश में व्यवसाय एवं समाज के हित में चलाये जा रहे विभिन्न नियम अधिनियम, सरकारी गजट, आदि आते हैं, जबकि न्यायिक घटक के अन्तर्गत व्यवसाय एवं समाज के हितों की रक्षा के लिए विवादों का समाधान करने के उपरान्त विभिन्न न्यायालयों द्वारा दिये गये निर्णय शामिल होते हैं। वैधानिक एवं न्यायिक घटक के अन्तर्गत मुख्यत: व्यावसायिक, औद्योगिक व श्रम सन्नियम शामिल होते हैं व प्रशासन व्यवस्था, व्यावसायिक, औद्योगिक व श्रम अधिनियम या सन्नियम के अन्तर्गत सरकार द्वारा समय-समय पर पारित अधिनियम जैसे - भारतीय संविदा अधिनियम (Indian Contract Act), 1872, भारतीय कम्पनी अधिनियम (Indian Companies Act), 1956; वस्तु विक्रय अधिनियम (Sales of Goods Act), 1930, भारतीय साझेदारी अधिनियम (Indian Partnership Act),1932, उद्योग विकास एवं नियमन अधिनियम (Industry Development and Regulation Act), 1951, एकाधिकार एवं प्रतिबंधित व्यापार व्यवहार अधिनियम (MRTP Act 1969), प्रतिभूति प्रसंविदा नियमन अधिनियम (Securities Contract Regulation Act), 1956; भारतीय कारखाना अधिनियम (Indian Factories Act), 1948; औद्योगिक विवाद अधिनियम (Industrial Dispute Act), 1947; कर्मचारी क्षतिपूर्ति अधिनियम, (Workmans Compensation Act), 1923; मजदूरी भुगतान अधिनियम, आवश्यक वस्तु अधिनियम, व्यापार एवं वस्तु चिन्ह अधिनियम आदि प्रमुख हैं जो देश की व्यावसायिक गतिविधियों को सुचारू रूप से चलाने में सहायता करते हैं।
8. योजना तैयार करना- सर्वोंत्तम विकल्प का चुनाव कर ले ने के पश्चात् योजना को विस्तार से तैयार किया जाता है। इस चरण में योजना के विभिन्न पहलुओं पर विचार करके योजना की क्रमिक अवस्थाओं का निर्धारण किया जाता है। सम्पूर्ण योजना को उत्पादन विभाग की दृष्टि से भी देखा जाता है। योजना की प्रत्येक अवस्था का निष्पादन समय भी निर्धारित किया जाता है। इसी चरण में योजना अपने अन्तिम रूप में प्रकट होती है।
राजनैतिक, शासकीय एवं प्रशासनिक वातावरण (Political, Governmental and Administrative environment) किसी देश की राजनीति, सरकार, प्रशासन तथा व्यवसाय के बीच होने वाली गतिविधियाँ व्यवसाय की कार्य प्रणाली को प्रभावित करती हैं। व्यवसाय की अनेक संरचनाओं का जन्म राजनैतिक निर्णयों के कारण होता है, कर्इ बार ऐसे राजनैतिक निर्णय होते हैं, जो व्यवसाय की समृद्धि में सहायक होते हैं। परन्तु कुछ व्यावसायिक निर्णय ऐसे होते हैं, जो व्यवसाय की पूरी दिशा ही बदल देते हैं। ये राजनैतिक निर्णय अनेक कारणों से प्रभावित व शासित होते हैं। इनमें विचारधाराएं, चिन्तन, जनकल्याण, जनसेवा, राजनैतिक दबाव, अन्तर्राष्ट्रीय प्रभाव/दबाव, स्वार्थ भावना, समूह विशेष का दबाव राष्ट्रीय सुरक्षा एवं एकता तथा राष्ट्रहित आदि प्रमुख हैं। शासकीय तथा प्रशासनिक वातावरण से परिचित होना अत्यन्त आवश्यक होता है, क्योंकि यही तत्व व्यावसायिक वातावरण को प्रभावित करते हैं।
आप अपनी वेबसाइट को फिर से डिजाइन क्यों कर रहे हैं? कुछ मामलों में आपका कार्य एक नया निर्माण करने के बजाय वेबसाइट को फिर से डिजाइन करना होगा, और इस मामले में इस रीडिज़ाइन के कारण को समझना बहुत महत्वपूर्ण है, क्या उनमे नई सुविधाएं जोड़ रहे हैं? क्या उन्होंने ब्रांडिंग बदल दी है? कारण जानने से आपको ऐसी किसी भी गलतियों से बचने में मदद मिलेगी, जिससे आप ऐसी सुविधा को हटा सकते हैं जो वास्तव में डिज़ाइन फ़ेसलिफ्ट का कारण हो।

Nearly 25 lakh Mid Day Meal Wo...rkers working under the school Mid Day Meal Scheme play a crucial role in combating the malnutrition in the country. Modi led BJP Government had done injustice to these grass root level by not increasing their remuneration. MDMWFI demand immediate increase in the wages of Mid Day Meal workers and implementation of the decisions of the 45th Indian Labour conference – recognition as workers, minimum wages Rs.18000 per month and pension and social security.
नीरो ने बस एक रोम जलाया था. उसने बहुत थोड़ी संख्या में लोगों की हत्या की थी. उसने तो बहुत थोड़ा दुख पैदा किया, अपने पूर्ण मनोरंजन के लिये. और उसका इतिहास में क्या स्थान है? उसे इतिहासकार किस नाम से बुलाते हैं? सभी विषैले विशेषण उस पर बरसाये जाते हैं. पन्ने उसकी निन्दा के वाक्यों से काले पुते हैं, भर्त्सना करते हैं – नीरो एक हृदयहीन, निर्दयी, दुष्ट. एक चंगेज खाँ ने अपने आनन्द के लिये कुछ हजार जानें ले लीं और आज हम उसके नाम से घृणा करते हैं. तब किस प्रकार तुम अपने ईश्वर को न्यायोचित ठहराते हो? उस शाश्वत नीरो को, जो हर दिन, हर घण्टे ओर हर मिनट असंख्य दुख देता रहा, और अभी भी दे रहा है. फिर तुम कैसे उसके दुष्कर्मों का पक्ष लेने की सोचते हो, जो चंगेज खाँ से प्रत्येक क्षण अधिक है? क्या यह सब बाद में इन निर्दोष कष्ट सहने वालों को पुरस्कार और गलती करने वालों को दण्ड देने के लिये हो रहा है? ठीक है, ठीक है. तुम कब तक उस व्यक्ति को उचित ठहराते रहोगे, जो हमारे शरीर पर घाव करने का साहस इसलिये करता है कि बाद में मुलायम और आरामदायक मलहम लगायेगा?
यदि आपने लीड के लिए पीपीसी पर भरोसा नहीं किया है, तो आप शायद इस अंतर्दृष्टि को भूल गए हों जब आपके बहुत सारे ट्रैफ़िक "फ्री" (Semaltेट) या विशेषता के लिए कठिन (शब्द-मुंह, ब्रांड आदि) होता है, तो आप गलत प्रकार के ग्राहकों को लक्षित करते समय तीव्र दर्द महसूस नहीं करते हैं। पीपीसी के साथ, आप उस बजट को खराब-लक्षित संभावनाओं पर पलायन कर सकते हैं और महसूस कर सकते हैं कि निकट अवधि में दर्दनाक प्रतिक्रिया। यह आपको स्मार्ट पाने के लिए मजबूर करता है!
एक लाभदायक अंडा व्यवसाय स्थापित करने के लिए, आपको वर्तमान बाजार की स्थिति का विश्लेषण करना चाहिए और लक्ष्य ग्राहक के व्यवहार और उपभोग के पैटर्न को समझना होगा। आने वाले भविष्य में हम अंडे रेस्तरां व्यवसाय के बारे में चर्चा कर रहे हैं। यदि आप खाद्य सेवा के क्षेत्र में नए हैं तो फ्रेंचाइजींग मार्ग चुनें क्योंकि यह तनाव-मुक्त है क्योंकि किसी ने पहले ही इसका परीक्षण किया है। अंडा रेस्तरां की अवधारणा लाभदायक है, मोहक और शानदार है क्योंकि भारत में कोई ब्रांड ही कभी अंडा आधारित व्यंजन पेश करने की हिम्मत नहीं करता है। आप संगठित प्रारूप में स्वादिष्ट व्यंजनों की पेशकश कर बहुत से लाभ कमा सकते हैं। किसी भी व्यावसायिक उद्यम में निवेश करने से पहले, जांच करें कि प्रतियोगियों क्या पेशकश कर रहे हैं।
The Convention expressed its grave concern on scraping of hard-won 44 Central Labour Laws and replacing them with 4 employer-friendly Labour Codes and introduction of Fixed Term Employment through executive order. The Convention also expressed its anguish over New Pension Scheme and demand restoration of the old Pension Scheme. The Convention expresses solidarity with the fighting farmers and the Transport Workers of Rajasthan who are on an indefinite strike since 16th September, 2018.
सीमित बजट वाले और सशुल्क एसईओ उपकरण तक पहुंच के बिना, प्रभावपूर्ण खोजशब्द डेटा पहुंच से बाहर नहीं है। ऐसे बहुत सारे डेटा स्रोत और उपकरण हैं जिनका इस्तेमाल मुफ्त में मुफ्त संस्करणों के लिए किया जा सकता है। कई निशुल्क उपकरण का लाभ उठाकर, विज्ञापनदाता खोजशब्द लक्ष्यों पर सूचित निर्णय लेने और सफल एसईओ अभियानों के लिए खुद को स्थापित करने के लिए पर्याप्त जानकारी उत्पन्न कर सकते हैं।
जलवायु (Climate) - किसी भी देश की जलवायु व्यावसायिक वातावरण का प्रमुख निर्धारक घटक है। जलवायु के आधार पर भी अनेक व्यवसाय स्थापित एवं संचालित होते हैं। देश में जहाँ पर एक जैसी जलवायु रहती है, वहाँ अलग-अलग प्रकार के व्यवसाय सफल रहते हैं परन्तु वर्ष में विभिन्न जलवायु वाले क्षेत्रों में किसी एक ही प्रकार व प्रकृति के व्यवसाय सफल होते हैं। इस प्रकार यदि व्यवसाय जलवायु पर निर्भर करता है, तो ऐसी स्थिति में व्यवसाय की सफलता काफी सीमा तक जलवायु पर निर्भर होगी।
यदि आपने लीड के लिए पीपीसी पर भरोसा नहीं किया है, तो आप शायद इस अंतर्दृष्टि को भूल गए हों जब आपके बहुत सारे ट्रैफ़िक "फ्री" (Semaltेट) या विशेषता के लिए कठिन (शब्द-मुंह, ब्रांड आदि) होता है, तो आप गलत प्रकार के ग्राहकों को लक्षित करते समय तीव्र दर्द महसूस नहीं करते हैं। पीपीसी के साथ, आप उस बजट को खराब-लक्षित संभावनाओं पर पलायन कर सकते हैं और महसूस कर सकते हैं कि निकट अवधि में दर्दनाक प्रतिक्रिया। यह आपको स्मार्ट पाने के लिए मजबूर करता है!
6. अपवाद द्वारा प्रबन्ध : अपवाद द्वारा प्रबन्ध से अर्थ यह है, कि प्रबन्धक को प्रत्येक क्रिया में सम्मिलित नहीं होना चाहिए। यदि सब काम ठीक-ठाक चल रहा हो तो प्रबन्धक को निश्चिन्त रहना चाहिए और केवल उसी समय बीच में आना चाहिए जब कार्य नियोजन के अनुसार न चल रहा हो। नियोजन द्वारा संस्था के उद्देश्य निर्धारित कर दिए जाते हैं और सभी प्रयास उनको प्राप्त करने के लिए ही किए जाते हैं। इस प्रकार प्रबन्ध को दैनिक कार्यों में उलझने की आवश्यकता नहीं हैं, अत: कहा जा सकता है, कि नियोजन से अपवाद द्वारा प्रबन्ध सम्भव हैं, जिसके परिणामस्वरूप प्रबन्धकों के पास इतना समय बच जाता है, कि वे और आर्थिक सोच-विचार करके श्रेष्ठ योजनाएँ तैयार करें।

व्यापारिक आचार संहिता (Business code of conduct)- विभिन्न व्यवसायेां में व्यापारिक आचार संहिता विद्यमान रहती है। यह आचार संहिता समाज के हित को ध्यान में रखकर सरकार द्वारा निर्मित एवं विनियमित की जाती हैं। इसके अन्तर्गत व्यवसाय को सुचारू रूप से चलाने के लिए कानून, नियम व दिशा-निर्देश रहते हैं। यह आचार संहिता विभिन्न प्रकार की प्रकृति के व्यवसायेां के लिए भिन्न-भिन्न होती है। व्यवसाय को इन्हीं आचार संहिताओं की परिर्मिा में रहकर संचालित होना पड़ता है। इस प्रकार कहा जा सकता है कि ये आचार संहितायें व्यवसाय के आन्तरिक तत्व को प्रभावित करती है।
मनुष्य की सीमाओं को पहचानने पर, उसकी दुर्बलता व दोष को समझने के बाद परीक्षा की घड़ियों में मनुष्य को बहादुरी से सामना करने के लिये उत्साहित करने, सभी ख़तरों को पुरुषत्व के साथ झेलने और सम्पन्नता एवं ऐश्वर्य में उसके विस्फोट को बाँधने के लिये ईश्वर के काल्पनिक अस्तित्व की रचना हुई. अपने व्यक्तिगत नियमों और अभिभावकीय उदारता से पूर्ण ईश्वर की बढ़ा-चढ़ा कर कल्पना एवं चित्रण किया गया. जब उसकी उग्रता और व्यक्तिगत नियमों की चर्चा होती है, तो उसका उपयोग एक भय दिखाने वाले के रूप में किया जाता है. ताकि कोई मनुष्य समाज के लिये ख़तरा न बन जाये. जब उसके अभिभावक गुणों की व्याख्या होती है, तो उसका उपयोग एक पिता, माता, भाई, बहन, दोस्त और सहायक की तरह किया जाता है.
 मन में उन तीन सत्य के साथ, मैं आप अपनी खुद की साइट का सही एसईओ रैंकिंग न्यायाधीश मदद करने के लिए जा रहा हूँ। मैं, यह “”पीआर”” रैंकिंग या पृष्ठस्तर फोन नहीं किया क्योंकि है कि वास्तव में अतीत की एक विरूपण साक्ष्य है। वहाँ “”रैंकिंग”” की एक नई प्रकार है कि आप सभी कारकों खोज इंजन को ध्यान में रखना के आधार पर उपयोग करना चाहिए। इस अनुच्छेद में, मैं मदद करने के लिए आप अपनी साइट का असली एसईओ मूल्य निर्धारित जा रहा हूँ।

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